दफा 457 तुम पे लगती लिरिक्स, Agar Tum Me Chori Ki aadat Na Hoti Lyrics
यहाँ दफा 457 तुम पे लगती लिरिक्स, Agar Tum Me Chori Ki aadat Na Hoti Lyrics और इसका हिंदी में नोटेशन भी दिया जा रहा है |
Agar Tum Me Chori Ki aadat Na Hoti Lyrics
दफा 457 तुम पे लगती लिरिक्स | Agar Tum Me Chori Ki aadat Na Hoti Lyrics In Hindi
अगर तुम में चोरी की आदत न होती,
तो ब्रज में यूं मोहन बगावत न होती |
जो घर-घर में माखन चुराया न होता,
तो हर दिन तुम्हारी शिकायत न होती |
तो हर दिन तुम्हारी शिकायत न होती ||
जो माखन की मटकी लुटाई न होती,
यूं घर-घर में चर्चा कन्हाई न होती |
भला कौन कहता तुम्हें चोर छलिया,
बिगाड़ी किसी की अमानत न होती |
बिगाड़ी किसी की अमानत न होती ||
ये हँसना हसाना ये मन का लुभाना,
सभी भूल जाते ये बातें बनाना |
मज़ा चोरी का तुम को मिल जाता मोहन,
गुजरिया में अगर जो शराफत न होती |
गुजरिया में अगर जो शराफत न होती ||
पकड़ के गुजरिया तुम्हे कैद करती,
नन्द की कचहरी में फिर पेश करती |
तो दफा 457 तुम पे लगती,
कसम से तुम्हारी जमानत न होती |
कसम से तुम्हारी जमानत न होती ||
कभी चीर हरना कभी लुट लेना,
ये करम हैं तुम्हारे किसे दोष देना |
गुजरिया को झूठी समझ लेते चेतन,
अगर तुम में ऐसी शरारत न होती |
अगर तुम में ऐसी शरारत न होती ||
दफा 457 तुम पे लगती नोट्स, Agar Tum Me Chori Ki aadat Na Hoti Sargam Notes

यहाँ दफा 457 तुम पे लगती नोट्स, Agar Tum Me Chori Ki aadat Na Hoti Sargam Notes इस दफा 457 तुम पे लगती नोट्स, Agar Tum Me Chori Ki aadat Na Hoti Sargam Notes में लगाने वाले स्वर इस प्रकार से हैं –
मध्य सप्तक में सा, रे, कोमल ग, प, ध और तार सप्तक में सां और रें दोनों गं | तार सप्तक में शुद्ध ग का एक ही जगह प्रयोग हुआ है इसलिए शुद्ध ग को पहचानने के लिए ( गं/ ) का प्रयोग किया गया है | अतः इस Agar Tum Me Chori Ki aadat Na Hoti Sargam Notes में सभी ग कोमल हैं इसलिए कोमल स्वरों के लिए किसी भी चिन्ह का प्रयोग नहीं किया गया है |
अगर तुम में चोरी की आदत न होती
पप ध प पध प गरेरे रे गप
तो ब्रज में यूं मोहन बगावत न होती
प प ध प पध पगग रे सासा
जो घर-घर में माखन चुराया न होता
गं गं गं गं गंगं गंरेंसां सां रेंरें
तो हर दिन तुम्हारी शिकायत न होती
गं/ गं/ गं/ गं/गं गंरेंरें सां सांसां
तो हर दिन तुम्हारी शिकायत न होती
प प ध पपध पगग रे सासा
जो माखन की मटकी लुटाई न होती
प पध प पध पगरे रे गप
यूं घर-घर में चर्चा कन्हाई न होती
प प ध प पध पगग रे सासा
भला कौन कहता तुम्हें चोर छलिया
गंगं गंगं गंगं गंरेंसां सां रेंरें
बिगाड़ी किसी की अमानत न होती
गं/गं/ गं/गं/ गं गंरेंरें सां सांसां
बिगाड़ी किसी की अमानत न होती
पपध पप ध पगग रे सासा
ये हँसना हसाना ये मन का लुभाना
प पध पपध प गरे रे रेगप
सभी भूल जाते ये बातें बनाना
पप धप पध प गग रेसासा
मज़ा चोरी का तुम को मिल जाता मोहन
गंगं गंगं गं गं गं रें सांसां रेंरें
गुजरिया में अगर जो शराफत न होती
गं/गं/ गं/ गं/ गं गंरेंरें सां सांसां
गुजरिया में अगर जो शराफत न होती
पपध प पध ध पगग रे सासा
पकड़ के गुजरिया तुम्हे कैद करती
पप ध पपध पग रेरे गप
नन्द की कचहरी में फिर पेश करती
पप ध पपध प ग रेरे सासा
तो दफा चारसौ सत्तावन तुम पे लगती
गं गंगं गंगं गंगंगं रें सां सांरें
कसम से तुम्हारी जमानत न होती
गं/गं/ गं/ गं/गं गंरेंरें सां सांसां
कसम से तुम्हारी जमानत न होती
पप ध पपध पगरे रे सासा
कभी चीर हरना कभी लुट लेना
पप धप पध पग रे गप
ये करम हैं तुम्हारे किसे दोष देना
प पध ध पपध पग रेरे सासा
गुजरिया को झूठी समझ लेते चेतन
गंगंगं गं गंगं गंरें सांसां रेंरें
अगर तुम में ऐसी शरारत न होती
गं/गं/ गं/ गं/ गं गंरेंरें सां सांसां
अगर तुम में ऐसी शरारत न होती
पप ध प पध पगरे रे सासा